
अहमदाबाद , शब्दरंग समाचार: गुजरात हाई कोर्ट ने बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को चिकित्सा कारणों के आधार पर तीन महीने की अस्थायी जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला उनकी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सुनाया।
इलाज के लिए मिली अस्थायी जमानत
86 वर्षीय आसाराम हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य उम्रजनित बीमारियों से ग्रसित हैं। फिलहाल, वह राजस्थान के जोधपुर में आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं। इससे पहले, उन्हें 31 मार्च तक अंतरिम जमानत दी गई थी, जो समाप्त होने वाली थी। इसी के मद्देनजर, उनके वकीलों ने हाई कोर्ट में तीन महीने की अतिरिक्त जमानत की याचिका दायर की थी।
कोर्ट में हुई बहस और फैसला
गुजरात हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ ने इस मामले पर अलग-अलग राय दी थी, जिससे यह मामला बड़ी पीठ के पास गया। न्यायमूर्ति ए.एस. सुपेहिया ने फैसला सुनाते हुए कहा कि उम्र और गंभीर बीमारी के आधार पर आसाराम को चिकित्सा उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए।
अलग-अलग फैसले देने वाले जजों की राय
इससे पहले, न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा ने तीन महीने की अस्थायी जमानत देने के पक्ष में फैसला सुनाया, जबकि न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने इसे खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति भट्ट का कहना था कि रिकॉर्ड के अनुसार, 7 जनवरी से अंतरिम जमानत मिलने के बावजूद, आसाराम ने 1 मार्च को ही अस्पताल का रुख किया, जिससे उनकी चिकित्सा स्थिति को लेकर संदेह पैदा होता है।
क्या है पूरा मामला?
आसाराम को 2013 में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। 2018 में, जोधपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उन पर गुजरात में भी एक अन्य महिला से बलात्कार का मामला दर्ज है, जिसके तहत यह अस्थायी जमानत दी गई है।
अब आगे क्या?
आसाराम को तीन महीने की जमानत तो मिल गई है, लेकिन यह मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है। यदि उनकी चिकित्सा स्थिति में कोई सुधार नहीं होता, तो वह आगे और राहत की मांग कर सकते हैं। वहीं, पीड़िता के वकील और अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह जमानत उनके प्रभाव का दुरुपयोग करने का अवसर भी बन सकती है।