
शब्दरंग समाचार, हैदराबाद/नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2025: हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पास जंगल की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तेलंगाना सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने 400 एकड़ जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि अब वहां केवल पेड़ों की सुरक्षा के लिए ही कार्य हो सकता है।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तेलंगाना में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को ‘गंभीर समस्या’ बताया। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पेड़ काटने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन (ईआईए) कराया गया था? साथ ही यह भी पूछा कि इतनी जल्दी काम शुरू करने की क्या वजह थी।
पृष्ठभूमि:
यूनिवर्सिटी छात्रों ने 30 मार्च को इस पर्यावरणीय नुकसान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। जब पुलिस की मौजूदगी में जमीन समतल करने के लिए बुलडोजर लाए गए, तब छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। छात्र बुलडोजर पर चढ़कर विरोध जताने लगे, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक हटाया और करीब 200 छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस का दावा:
पुलिस ने कहा कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले 53 छात्रों को हिरासत में लिया गया और उन पर हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वहीं, छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और छात्राओं के साथ अभद्रता भी हुई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी पार्टी BRS ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि “यह मोहब्बत की दुकान नहीं, विश्वासघात का बाजार है।” BRS नेता केटी रामा राव ने सवाल उठाया कि जो राहुल गांधी आरे और हसदेव जंगलों के लिए आवाज उठा चुके हैं, वे अब क्यों चुप हैं जब उन्हीं की सरकार पेड़ों की कटाई करवा रही है?
अगली सुनवाई:
मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जिसमें राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा।