नागपुर में मोहन भागवत का बयान – “हनुमान पौराणिक आदर्श, शिवाजी आधुनिक आदर्श”

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Mohan Bhagwat
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नागपुर, 2 अप्रैल , शब्दरंग समाचार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें आधुनिक युग का आदर्श बताया। वे ‘युगांधर शिवराय’ नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

शिवाजी ने बदला पराजय का युग

मोहन भागवत ने कहा कि राजा अलेक्जेंडर (सिकंदर) के आक्रमण के समय से भारत को बार-बार पराजय झेलनी पड़ी, विशेष रूप से इस्लामिक आक्रमणों के दौरान। हालांकि, जब कोई समाधान नहीं दिख रहा था, तब शिवाजी महाराज ने इस समस्या का समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने न केवल मराठा साम्राज्य की स्थापना की, बल्कि भारत के पराजय के युग को बदलते हुए नए सिरे से राष्ट्र के निर्माण की दिशा दिखाई।

Chatrapati Shivaji
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हनुमान पौराणिक आदर्श, शिवाजी आधुनिक आदर्श

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, एम.एस. गोलवलकर और एम.डी. देवरस जैसे संघ के पूर्व नेताओं ने भी हमेशा शिवाजी महाराज को आधुनिक आदर्श माना। भागवत ने कहा, “हनुमान हमारे पौराणिक आदर्श हैं, जबकि शिवाजी महाराज आधुनिक युग के प्रेरणास्रोत हैं। वे न केवल अपने समय में बल्कि आज भी हमारे लिए आदर्श बने हुए हैं।”

शिवाजी की प्रासंगिकता आज भी बरकरार

भागवत ने शिवाजी की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे सिर्फ ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि उनके विचार और नेतृत्व आज भी राष्ट्र निर्माण में उपयोगी हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि दक्षिण भारत के अभिनेता गणेशन ने जब शिवाजी पर बनी फिल्म में काम किया, तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना नाम ‘शिवाजी गणेशन’ रख लिया।

शिवाजी की विरासत और राष्ट्रवाद

भागवत ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिवाजी महाराज ने राष्ट्रवाद और हिंदवी स्वराज्य की भावना को मजबूत किया। उन्होंने दक्षिण भारत में विजय प्राप्त की, लेकिन उत्तर भारत की ओर अधिक विस्तार करने का अवसर नहीं मिला। फिर भी, उनके प्रयासों ने मराठा साम्राज्य को मजबूती दी और भारत में विदेशी आक्रमणों के खिलाफ एक नई रणनीति प्रस्तुत की।

मोहन भागवत का यह बयान शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक भूमिका को नए दृष्टिकोण से देखने का संदेश देता है। उनकी विचारधारा और कार्यशैली आज भी भारतीय समाज और राष्ट्रवाद के संदर्भ में प्रासंगिक मानी जाती है।

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