
शब्दरंग समाचार : ह्यूस्टन (टेक्सस) के जॉनसन स्पेस सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष अनुभवों को साझा किया। इस दौरान उनके साथ अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर और निक हेग भी मौजूद थे।
अंतरिक्ष से भारत का नज़ारा
एक पत्रकार के सवाल पर कि स्पेस से भारत कैसा दिखाई देता है, सुनीता विलियम्स ने कहा, “भारत शानदार है। जब भी हम हिमालय के ऊपर से गुज़रते थे, तो उसकी खूबसूरती देखते ही बनती थी। बुच ने हिमालय की कुछ शानदार तस्वीरें ली थीं।”
उन्होंने आगे बताया, “भारत की छवि मेरे दिमाग में रोशनी के नेटवर्क की तरह है, जो बड़े शहरों से छोटे शहरों की ओर जाती है। रात में इसे देखना बेहद खूबसूरत होता है।”
इसरो के साथ सहयोग की इच्छा
भारत और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के साथ अपने जुड़ाव पर उन्होंने कहा, “मैं भारत जरूर जाना चाहूंगी, जहां मेरे पिता का घर है। मुझे भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों से मिलकर अपने अनुभव साझा करने की खुशी होगी। भारत स्पेस में बड़ी प्रगति कर रहा है और मैं उसमें सहयोग देने को तैयार हूं।”
स्पेस में 9 महीने और तकनीकी चुनौतियां
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 5 जून को बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) गए थे। उन्हें एक सप्ताह में लौटना था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण यह मिशन 9 महीने तक लंबा हो गया। आखिरकार, 286 दिनों के बाद, 19 मार्च को वे सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटे।
गुजरात के झुलासण गांव में जश्न
गुजरात के झुलासण गांव, जहां उनके पिता दीपक पंड्या का जन्म हुआ था, में इस मिशन को लेकर खास उत्साह था। गांववासियों ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थनाएं की थीं। सुनीता इससे पहले 2007 और 2013 में अपने गांव आ चुकी हैं।
स्पेस में जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्पेस में लंबे समय तक रहने के प्रभावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “शरीर को शून्य गुरुत्वाकर्षण में ढालने में समय लगता है। जब मैं वापस आई, तो पहले दिन हम सभी थोड़ा लड़खड़ा रहे थे। यह कमाल की बात है कि 24 घंटों के भीतर हमारा नर्वस सिस्टम खुद को रीसेट कर लेता है।”
आईएसएस में मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी को रोकने के लिए रोज़ाना चार घंटे का व्यायाम जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि वहां हर दिन 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखने को मिलते हैं, जिससे तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहता है।
वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य की योजनाएं
286 दिनों के दौरान सुनीता और उनकी टीम ने 900 घंटे तक वैज्ञानिक अनुसंधान किए और 150 प्रयोगों को पूरा किया। उन्होंने कहा कि इसरो और अन्य भारतीय वैज्ञानिकों के साथ इन अनुभवों को साझा करना उनके लिए सम्मानजनक होगा।
सुनीता विलियम्स की इस उपलब्धि ने भारत और दुनिया भर में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति उत्साह बढ़ाया है।